Wednesday, October 11, 2017

The Most Daring Commando Mission By Israel

27 जून 1976 को तेल अवीव से पेरिस जा रही एयर फ़्रांस की फ़्लाइट 139 ने एथेंस में रुकने के बाद फिर से उड़ान भरी ही थी कि चार यात्री एकदम से उठे. उनके हाथों में पिस्टल और ग्रेनेड थे.
उन्होंने विमान पर नियंत्रण करने के बाद पायलट को लीबिया के शहर बेनग़ाज़ी चलने का आदेश दिया. इन चार अपहरणकर्ताओं में दो फ़लस्तीनी थे और दो जर्मन.
उस विमान में सफ़र कर रहे जियान हारतुव याद करते हैं कि उन चारों में से एक महिला ब्रिजेत कुलमान ने हैंड ग्रेनेड की पिन निकालकर सारे यात्रियों को धमकाया कि अगर किसी ने भी प्रतिरोध करने की कोशिश की तो वो विमान में धमाका कर देगी.
बेनग़ाज़ी में सात घंटे रुकने और ईंधन लेने के बाद अपहरणकर्ताओं ने पायलट को आदेश दिया कि विमान को युगांडा के एन्तेबे हवाई अड्डे ले जाया जाए.

उस समय युगांडा में तानाशाह इदी अमीन का शासन था. उनकी पूरी सहानुभूति अपहरणकर्ताओं के साथ थी. एन्तेबे हवाई अड्डे पर चार और साथी उनसे आ मिले.
उन्होंने यहूदी बंधकों को अलग कर दिया और दुनिया के अलग अलग देशों की जेलों में रह रहे 54 फ़लस्तीनी कैदियों को रिहा करने की मांग की और धमकी दी कि ऐसा नहीं किया गया तो वे यात्रियों को एक-एक करके मारना शुरू कर देंगे.
एन्तेबे इसराइल से करीब 4000 किलोमीटर दूर था, इसलिए किसी बचाव मिशन के बारे में सोचा तक नहीं जा सकता था. यात्रियों के संबंधियों ने तेल अवीव में प्रदर्शन करने शुरू कर दिए थे.
बंधक बनाए गए लोगों में से कुछ इसराइली प्रधानमंत्री रबीन के क़रीबी भी थे. उन पर बहुत दबाव था कि बंधकों को हर हालत में छुड़ाया जाए.
'यहूदी बंधकों को अलग किया'
बंधकों में से एक सारा डेविडसन याद करती हैं कि अपहरणकर्ताओं ने बंधकों को दो समूहों में बांट दिया था, ''उन्होंने लोगों के नाम पुकारे और उन्हें दूसरे कमरे में जाने के लिए कहा. थोड़ी देर बाद पता चल गया कि वो सिर्फ यहूदी लोगों के नाम पुकार रहे हैं.''


इस बीच अपहरणकर्ताओं ने 47 ग़ैर यहूदी यात्रियों को रिहा कर दिया. उन्हें एक विशेष विमान से पेरिस ले जाया गया. वहाँ मोसाद के जासूसों ने उनसे बात कर एन्तेबे के बारे में छोटी से छोटी जानकारी जुटाने की कोशिश की.
मोसाद के एक एजेंट ने कीनिया में एक विमान किराए पर लेकर एन्तेबे के ऊपर उड़ान भरकर उसकी बहुत सारी तस्वीरें खींची. दिलचस्प बात यह थी कि एन्तेबे हवाई अड्डे के टर्मिनल को जहाँ बंधकों को रखा गया था, एक इसराइली कंपनी ने बनाया था.
कंपनी ने उस टर्मिनल का नक्शा उपलब्ध कराया और रातों रात इसराइल में एक नकली टर्मिनल खड़ा कर लिया गया ताकि इसराइली कमांडो उस पर हमले का अभ्यास कर सकें.
मिशन के लिए सर्वश्रेष्ठ सैनिक
इसराइली सेना के 200 सर्वश्रेष्ठ सैनिकों को इस मिशन के लिए चुना गया. कमांडो मिशन में सबसे बड़ी अड़चन इस बात की थी कि कहीं एन्तेबे हवाई अड्डे के रनवे की बत्तियाँ रात में बुझा तो नहीं दी जाएंगी और इदी अमीन के सैनिक विमान को उतरने से रोकने के लिए रनवे पर ट्रक तो नहीं खड़ा कर देंगे.
इस बीच इसराइल की सरकार ने संकेत दिया कि वो अपहरणकर्ताओं से बातचीत करने के लिए तैयार है ताकि कमांडोज़ को तैयारी के लिए थोड़ा समय मिल जाए. इदी अमीन के दोस्त समझे जाने वाले पूर्व सैनिक अधिकारी बार लेव को उनसे बात करने के लिए लगाया गया.
उन्होंने अमीन से कई बार फ़ोन पर बात की लेकिन वो बंधको को छुड़ा पाने में असफल रहे. इस बीच इदी अमीन अफ़्रीकी एकता संगठन की बैठक में भाग लेने के लिए मॉरिशस की राजधानी पोर्ट लुई चले गए जिससे इसराइल को और समय मिल गया.

उस समय जनरल अशोक मेहता भारतीय सेना में लेफ़्टिनेंट कर्नल हुआ करते थे और अमरीका में पोर्ट लैवनवर्थ के कमांड एंड जनरल स्टाफ़ कालेज में प्रशिक्षण ले रहे थे.उड़ते विमान में ईंधन भरा
जनरल अशोक मेहता बताते हैं कि इस पूरे मिशन की सबसे बड़ी दिक्कत ये थी कि 4000 किलोमीटर जाकर 4000 किलोमीटर वापस भी आना था. इसलिए हवा में ही उड़ते विमान से दूसरे विमान में ईधन भरा गया.
ब्रिगेडियर जनरल डैम शॉमरॉन को पूरे मिशन की ज़िम्मेदारी दी गई, जबकि लेफ़्टिनेंट कर्नल योनाथन नेतन्याहू को फ़ील्ड ऑपरेशन का इंचार्ज बनाया गया.
इसराइल के पास तीन विकल्प थे. पहला हमले के लिए विमानों का सहारा लिया जाए. दूसरा नौकाओं से वहाँ पहुंचा जाए और तीसरा कीनिया से सड़क मार्ग से युगांडा में घुसा जाए.
अंतत: तय हुआ कि एन्तेबे पहुंचने के लिए विमानों का इस्तेमाल होगा और युगांडा के सैनिकों को ये आभास दिया जाएगा कि इन विमानों में राष्ट्रपति अमीन विदेश यात्रा से लौट रहे हैं.

4 जुलाई को इसराइल के साइनाइ बेस से चार हरक्यूलिस जहाज़ों ने उड़ान भरी. सिर्फ़ 30 मीटर की ऊंचाई पर उड़ते हुए उन्होंने लाल सागर पार किया ताकि मिस्र, सूडान और सऊदी अरब के रडार उन्हें न पकड़ पाएं. रास्ते में इसराइली कमांडोज़ ने युगांडा के सैनिकों की वर्दी पहन ली.सिर्फ़ छह मिनट का समय
विमानों के उड़ान भरने के बाद ही प्रधानमंत्री राबीन ने इस मिशन की जानकारी मंत्रिमंडल को दी.
सात घंटे लगातार उड़ने के बाद रात के एक बजे पहला हरक्यूलिस विमान एन्तेबे के ऊपर पहुंचा.
उसके पास लैंड करने और अपहरणकर्ताओं पर काबू पाने के लिए सिर्फ छह मिनट का समय था.
उस समय रनवे की लाइट जल रही थी. लैंड करने से आठ मिनट पहले ही हरक्यूलिस के रैंप खोल दिए गए ताकि कम से कम समय जाया हो.
लैंड करते ही पायलट ने विमान को रनवे के बीचोंबीच रोक लिया ताकि पैराट्रूपर्स के एक दल को नीचे उतारा जा सके और वो रनवे पर पीछे आ रहे विमानों के लिए एमरजेंसी लाइट लगा सकें.
मर्सिडीज़ कार का धोखा
जहाज़ से एक काली मर्सिडीज़ कार उतारी गई. यह उस कार से बहुत मिलती-जुलती थी जिसे राष्ट्रपति अमीन इस्तेमाल किया करते थे.
उसके पीछे कमांडोज़ से भरी हुई दो लैंड रोवर गाड़ियाँ भी उतारी गईं. इन वाहनों ने तेज़ी से टर्मिनल की तरफ बढ़ना शुरू किया.
कमांडोज़ को आदेश थे कि वो तब तक गोली न चलाएं जब तक वो टर्मिनल तक नहीं पहुंच जाते.
इसराइली उम्मीद कर रहे थे कि काली मर्सिडीज़ कार देखकर युगांडा के सैनिक समझेंगे कि इदी अमीन बंधकों से मिलने आए हैं.
लेकिन इसराइलियों को पता नहीं था कि कुछ दिन पहले ही अमीन ने अपनी कार बदल दी थी और अब वो सफेद मर्सिडीज़ का इस्तेमाल कर रहे थे.
यही वजह थी कि टर्मिनल के बाहर खड़े युगांडा के सैनिकों ने अपनी राइफ़लें निकाल लीं. इसराइली कमांडोज़ ने उन्हें साइलेंसर लगी बंदूकों से वहीं उड़ा दिया. उनका भेद खुल चुका था.


गोली चलते ही कमांडर ने आदेश दिया कि वाहनों से उतरकर पैदल ही उस टर्मिनल के भवन पर धावा बोल दिया जाए जहाँ यात्रियों को रखा गया था. कमांडोज़ ने बुल हॉर्न के ज़रिए बंधकों से अंग्रेज़ी और हिब्रू में कहा कि वो इसराइली सैनिक हैं और उन्हें बचाने के लिए आए हैं.
उन्होंने यात्रियों से फ़ौरन लेट जाने के लिए कहा. उन्होंने यात्रियों से हिब्रू में पूछा कि अपहरणकर्ता कहाँ हैं.
यात्रियों ने मुख्य हॉल में खुलने वाले दरवाज़े की तरफ़ इशारा किया. कमांडोज़ हैंड ग्रेनेड फेंकते हुए हॉल में घुसे. इसराइली कमांडोज़ को देखते ही अपहरणकर्ताओं ने गोलियाँ चलाना शुरू कर दिया.
इसराइल का केवल एक सैनिक मारा गया
गोलियों के आदान-प्रदान में सभी अपहरणकर्ता मारे गए. माता-पिता अपने बच्चों को बचाने के लिए उनके ऊपर लेट गए.
तीन बंधक भी गोलियों का निशाना बने. इस बीच दो और इसराइली विमान वहाँ उतर चुके थे. उनमें भी इसराइली सैनिक थे.
चौथा विमान पूरी तरह से खाली था ताकि उसमें बचाए गए बंधकों को ले जाया जा सके.
एन्तेबे पर उतरने के बीस मिनटों के भीतर ही बंधकों को लैंडरोवर्स में भरकर खाली विमान में पहुंचाया जाने लगा था. इस बीच युगांडाई सैनिकों ने गोलियाँ चलानी शुरू कर दी थी और पूरे हवाई अड्डे की बत्ती गुल कर दी गई थी.
चलने से पहले हर एक सैनिक की गिनती की गई. इस पूरे अभियान में इसराइल का सिर्फ एक सैनिक मारा गया. कंट्रोल टॉवर के ऊपर से चलाई गई एक गोली लेफ़्टिनेंट कर्नल नेतन्याहू के सीने में लगी और वो वहीं गिर गए.

सैनिकों ने घायल नेतन्याहू को विमान में डाला और एन्तेबे में लैंड करने के 58 मिनट बाद बचाए गए यात्रियों को विमान में लाद वहाँ से टेक आफ़ किया. इससे पहले उन्होंने एन्तेबे पर खड़े 11 मिग जहाज़ों को नष्ट कर दिया ताकि वो उनका पीछा नहीं कर सकें.नेतन्याहू ने वापसी उड़ान के दौरान दम तोड़ दिया. इस मिशन में सभी सात अपहरणकर्ता और 20 युगांडाई सैनिक मारे गए. एक बंदी डोरा ब्लॉक को वापस नहीं लाया जा सका क्योंकि वो हमले के समय कंपाला के मुलागो अस्पताल में थी.
बाद में युगांडा के अटॉर्नी जनरल ने वहाँ के मानवाधिकार आयोग को बताया कि इस मिशन के बाद इदी अमीन के आदेश पर दो सैनिक अफ़सरों ने डोरा ब्लॉक की अस्पताल के पलंग से खींचकर हत्या कर दी थी.
4 जुलाई की सुबह बचाए गए 102 यात्री और इसराइली कमांडो नैरोबी होते हुए तेल अवीव पहुंचे. इस पूरे अभियान को इसराइल के इतिहास का सबसे दुस्साहसी मिशन माना गया.

कमांडो दल के सदस्य लेफ़्टिनेंट कर्नल मोर याद करते हैं, ''जब हमने बेन गुरियों हवाई अड्डे पर लैंड किया तो इसराइल-वासियों का अथाह सागर उनके सम्मान में खड़ा था. स्वयं इसराइल के प्रधानमंत्री राबीन और मंत्रिमंडल के सभी सदस्य उनके स्वागत के लिए वहाँ पहुंचे हुए थे.''

जनरल अशोक मेहता याद करते हैं कि प्रधानमंत्री राबीन ने जब विपक्ष के नेता मेनाखिम बेगिन को बधाई और खुशखबरी देने के लिए बुलवाया तो बेगिन ने कहा, ''मैं शराब नहीं पीता, इसलिए मैं चाय पीकर इसे सेलेब्रेट करूंगा. राबीन ने उन्हे सिंगल मॉल्ट शराब सर्व की और कहा कि समझ लीजिए आप रंगीन चाय पी रहे हैं. बेगिन ने कहा कि आज के दिन मैं कुछ भी पी सकता हूँ. ये इसराइल के इतिहास का सबसे बड़ा दिन था. इस तरह का दु:साहसी अभियान न तो पहले सफल हुआ था और न शायद कभी होगा.''

Happy birthday to Sh. Amitabh Bachan Ji

Wish the Super Hero my childhood, teenage and all time my superhero


SH. AMITABH BACHAN JI


HAPPY BIRTHDAY TO YOU

MANY MANY MANY CONGRATULATIONS TO YOU




Wednesday, October 4, 2017

Goods & Service Tax (GST)

GST implementation has completed 3 months in India and government is pushing many efforts for smooth functioning of it but traders all over India are protesting against it, may be due to slowdown and problem arising out of money demonetization. The fall down in GDP growth has given a chance to political opponents to speak against GST. On the part of government the failure of GST Website, technical issues, other issues had created a situation of harassment for GSTIN holders. The HSN code wise details, stock details, bill wise details for retailers and small shop keepers is really a big problem as they have to invest too much time in record generation, maintenance and keeping.

I think the government must push some computer and IT experts to solve down the issues faced by taxpayers in filing of GST returns and number of returns which needs to be filed every month should be brought down to single return per month. Tax may be collected every month via GSTR-3B and other complete details may be submitted by taxpayers on quarterly basis as it will give time to government to deal with IT issues and ease down the problem of traders. The step will definitely improve GDP and improve businesses. 

Let's see what government do in this regard, kindly post problems faced by you. Also mention ideas  and solutions according to you for GST.

eBay Intern Program 2017

Wednesday, September 13, 2017

The recent incident of killing of a small primary student of Ryan International School at Gurgaon again raised questions about loopholes in private educational institutes. The private institute employs fourth class staff without taking proper measures to earn profit. Private schools charge heavy fees in name of good education, providing world class facilities, security, communication etc. but the result is zero.
Their CCTV cameras don't work, they don't provide timely information to parents, they don't hire employees as per norms, but just thinks and operate to achieve maximum profits. Generally private schools hire lower grade staff like guard, sweeper, driver, conductor, gardener, peon etc. at very lower rates instead of hiring competent persons and generally these are very underpaid and have terrible working conditions.

In last decade even the working condition of teaching community has gone from bad to worse. Government gives lot of benefits to private educational school/colleges for betterment of society but in reality the money is going in the pocket of personal peoples through wrong ways or by making manipulations in system. Private schools never take care of complains of students and parents but pressurizes the parents and students to stop complaining. Even sometimes they use unfair means with parents.

Private education is highly commercialized and being carried out in country only for sole purpose of big profits.

Some big decision is required to change the private education system either through taking them under government control or imposing more strict rules and norms for them. They must be put under regular screening. Students, Parents associations are must be part of scrutiny process and grading of private institutes must be set for them.

Sunday, September 10, 2017

Bhiwani roads

In last few weeks at our city Bhiwani I seen that many important inner circle roads and streets are being constructed with inter locking tiles. Following two places are under construction :-
1.       Bichla Bazar from Kirori Mal Mandir to Jain Chowk
2.       Pather Phoda wali gali
I appreciate this move of local administration for construction of above bit as a citizen of this city it is also our responsibility to maintain the roads. Because of some personal benefits some of us dig these newly constructed roads for setting up of their temporary arrangement in front of their shops and sometime digged by hawkers which start the damage of these newly constructed roads and reduces it’s overall life as the tiles are interlocked once one tile will loose lock with others the chain will breakup and overall life period of the path/road will be short.


As per norms roads will be constructed only when the life span of previous construction is over so I request and appeal all bhiwani walas to maintain these new roads as it will increase pains of our own.

Wednesday, August 16, 2017

GORKHPUR INCIDENT

गोरखपुर  में हुई मौत  सिर्फ उन बच्चो  की मौत  नहीं है यह मौत  है कल के होनहार  भविष्य की जोकि आने  वाले  समय  में भारत की प्रगति के सहायक बनते परन्तु सभी राजनीतिक और सामाजिक  प्रभावसाली  वयक्ति  व्यस्त  राजनीतिक  रोटियां  सेकने में | पक्ष और विपक्ष की राजनीती में कोई भी उस दर्द को महसूस मह्सूस  नहीं कर पा रहा है जो एक माँ बाप के दिल में है, उन्होने क़्या खोया , उनकी क़्या गलती थी अब जब तक जाँच होगी, मुकदमा  चलेगा , की दोषी कौन  है , उसमे वर्षो  लग जायगे और न्यायपालिका के चक्कर लगाने से डरने वाले असहाय , गरीब और मज्बूर माँ बाप को कभी न्याय मिलेगा या नहीं क्योकि दोषी अभी तक तो जाँच के लिए जरूरी  दस्तावेजों , तथ्यो को पूर्ण रूप रूप से  बदल चुके  होंगे | छोटे  और अप्रभावी कारणों  को बड़ा करके दिखाया जाएगा  परन्तु असली कारण जैसे की लापरवाही ,  भ्रष्टाचार , रिश्वत आदि सबूतों  को मिटा  दिया गया होगा | 
सभी पाठको से अनुरोध है की अपनी तरफ से विचार और सुझाव प्रस्तुत करे की कैसे इस तरह की घटनाओं  की दोबारा भविष्य में होने से रोका जा सकता है | 
कृपया  राजनीती  से प्रेरित कोई भी कमेंट  न करे 
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Tuesday, August 1, 2017

लुप्त होती इंसानियत

आज की तेज दौड़ती ज़िंदगी में मानवता की संवेदना लुप्त होती जा रही है, यह बात मुजा कल रास्ते पर जाते हुए महसूस हुयी जब एक संकरे रास्ते पर माल के वजन से लदी हुई रिक्शा का एक पहिया सड़क के एक गड्डे में फंस गया और तुरंत ही वहाँ जाम लग गया | आसपास  और पिछे जाम में खड़े लोग सभी मिलकर उसको धमका रहे  थे की जल्दी आगे चल और वो बेचारा भी अपनी पूरी ताकत से रिक्शा खींचने की कोशिस  कर रहा था परन्तु रिक्शा में माल ज्यादा  होने के कारण वह असफल था और कोई भी जाम में से या आस पास से उसकी सहायता के लिया आगे नहीं आया, परन्तु जल्दी सभी को ज्यादा  थी | मै  जैसे  ही अपने स्कूटर को स्टैंड पर खड़ा करके आगे मदद के लिया जाने लगा तो पीछे वाले ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि स्कूटर बीच में खड़ा मत  करो | इसी बीच वो मज़दूर अपनी कोशिस में सफल हो गया और रास्ते का जाम खुल गया  तब मेरा मन में यह विचार आया की आज सभी कितने शून्य हो गया है | आज का मानव मानवता भूल  चूका  है, मदद, भावना, मानवता जैसे  शब्दो  का आज कोई मोल नहीं है तथा आने वाली पीढी को हम सौगात में कुछ अच्छा दे कैसे  जब हमारे  अंदर ही वो नैतिकता, इंसानियत नहीं बची है | 

सभी पढ़ने वालो से आग्रह है की आप अपनी तरफ से सुझाव प्रस्तुत करे की कैसा हम इंसानियत , मानवता और नैतिक मूल्यों को बचा सकते  है ताकि इन अच्छी  बातो को आने वाली नई पीढी को एक अच्छी विरासत दे सके| 

Tuesday, July 25, 2017

HON'BLE PRESIDENT OF INDIA

CONGRATULATION TO HON'BLE NEW PRESIDENT OF INDIA SH. RAM NATH KOVIND


IN HIS SPEECH HE REALLY PRESENTED THE TRUE PICTURE OF INDIA


AGAIN CONGRATULATIONS AND REGARDS TO NEW PRESIDENT AND BEST OF LUCK TO MY / OUR MOTHERLAND INDIA

Veteran scientist Prof Yashpal passes away at the age of ninety in Noida

SALUTE TO PROFESSOR, SCIENTIST AND VETERAN DR. YASHPAL

Sunday, July 23, 2017

BATTERY RICKSHAW OR E-RICKSHAW

Every day we listen, see and discuss about problem of transportation in our day to day life. We shows our concern through Facebook, twitter, whatsup etc. Many types of buses, auto-rickshaws, are available for commuting from one place to other. Technology is providing a big help to provides us new cost effective, cheap and comfortable alternatives in this direction. 

Image result for battery rickshaw
Electric vehicle is a step in this direction which not only reduces pollution but provides a cost effective way of transportation. The e-rickshaw is a cost effective way of transportation. The e-rickshaw or commonly known as battery rickshaw is playing a important role in it. The r rickshaw cost is approximately Rs.1,00,000/-(Rupees One Lac Only) depending upon its features, size, etc.   Recently Government of India only kept 12% GST on electric vehicles in comparison to other fuel operated vehicles.  It is a cheap way of transportation for common peoples and comfortable in comparison to old paddle operated rickshaw for drivers as it does not require human energy to run it. Also it provides a way of living for illiterate peoples. E-rickshaw is safer in comparison to other automobiles as their speed is less and light in weight than others. Their maintenance is very little as very few mechanical parts are there in it and it runs on batteries instead of fuel. I would like to mention here that battery rickshaw cannot be used for long distance travel as it needs to be charged at prescribed limits. Also the speed of these rickshaws is only 30-40 KMPH. Despite its plus and minus these are becoming popular in many cities of the country.

Wednesday, July 12, 2017

In one of my recent visit to a marriage function i seen that mostly people taken seat in their own vehicles and did not walked with 'Groom' till temple. Even before departure of Groom from home almost everyone is busy in himself surfing with their mobiles. Marriage party are not so much enjoying event now and most of the peoples just participate to complete formality. The modern busy life is just not have a impact on marriage events but completely dented our social culture. In death cases also people either reach directly to crimination ground or don't walk with body just move few meters and then take their vehicles and during process of crimination many are in hurry to move and don't stay their till completion of activity which is very bad. 

What steps should be taken to stop decreasing humanity / moral values in today modern life. How we should increase social co-operation and move forward to give help to others in hour of need as everyone has to pass through good and bad times and social programs are essential part of every human beings.

We must realize this decreasing mutual co-operation inside social structure otherwise in future if social co-operation will end it will be a very big factor in end of cultured society.

I invite all readers to please post your suggestion to increase social and moral values, harmony inside the society.

Sunday, April 2, 2017

India International Image

The victory of BJP in election of Uttar Pradesh and Uttarakhand and making of government in Goa and Manipur will provide clear majority to party in both houses of Parliament.  Mr. Narender Modi determination, initiatives and courage has made lot of proud and change of image of India on International Platform. As a Prime Minister of India his decision to make surgical strike, de-notisation changed Indian image of soft state to decision making state throughout the world. As a political leader of BJP his decision to fight election in most states without any coalition and despite losing Bihar election is fruitful at last. The common man of India wants to see the changes in system since very long and Yes the action and decisions made an impression in the mind of common man that he is moving in the direction expected by common man of India. He is trying to rotate the system in different angle. After getting clear majority in Rajya Sabha the BJP government will be able to take more hard and bold decisions in interest of the Nation. The young Indian generation has given votes to Modi Ji ignoring the caste and religion factor. Here it is important to mention that appointment of Mr. Yogi as Chief Minister of Uttar Pradesh will definitely make impact on peoples mind if he acts as a hardliner of Hindutava and if Mr. Yogi got succeeded in fulfilling the election promises of Mr. Modi and his party in coming months then surely he will be also a winner like Mr. Modi in eyes of UP peoples. It is also in media that Ram Mandir and some other old promises of BJP may be completed by BJP government in coming year but it will make a very bad impact on international secular image of the State of India however if Government of India completes the Ram Mandir in a peaceful manner with support of Muslim Community and legal way then India will be able to present a new way to the World and its Image in International System will be UNIQUE. BEST OF LUCK TO MY COUNTRY.

Wednesday, March 22, 2017

हमारा पर्यावरण

सूखे पतों  को हम जलाते है

धुंआ फैलाते है ,

पर्यावरण  को नुकसान पहुँचाते है   

कब संभलेंगे हम

कद्र  करो प्रकृति की

वरना मिट जाआगे
हरी भरी हो दुनिया सारी
ले सके साँस आने वाली नस्ले हमारी

ना दे वो ताना की
हमने बिगाड़ा भविष्य उनका
मत बनो जिम्मेदार अपने
ही बच्चो की मौत का

रखना है अगर मनुष्य जीवन कायम
तो पेड़ लगाओ , पेड़ बचाओ , पेड बचाओ
उठो , जागो, आगे बढ़ो और पर्यावरण बचाओ

Thursday, March 9, 2017

Think before you Quit / Business Rule

if you want to quit your regular job and want to do something online then make sure that you don't pay any money in advance as memberships charges/registration charges etc. A general rule exist in our world "ONLY BEST FITTEST WILL SURVIVE" means there is "NO FREE LUNCH". You will get paid according to your work as per market prices. If someone offers high reimbursement than market prices it means there is a very strong probability that it is a scam/fraud. Only very rare of rarest chance of genuineness exist because invention, innovation, knowledge works within the framework of society, system and marketplace. Part time job needs less time and a bit of more money generally 25% more rates in comparison to regular job rates. But in regular job you put time more than the committed but gets income regularly. If you really want to do something online then you must have a ground base ready means the basic elements to start, run and operate a project like money, manpower, material, machinery and management must be readily available. Online is a subsidiary tool or way for your basic business to re-innovate but may not act as full flashed path of success. If you really want to work on a project then you must need to give it a time of 3-4 years in first year you need to gain knowledge, expertise etc. about the work. In first year of work you may need to bear some losses as you are new entrant. In addition to losses of 1st year you also need to fulfil and arrange your personal household expenses which puts financial pressure on you. In starting year you need to give much time to business and have less time for your personal family life.
In second year you will have some knowledge as well as some establishment and your work will go on for no profit / no loss basis but during 2nd year also you have to give complete time to your project.
In third year you will gain some grip on project based on your knowledge, strength and grip. You will surely have some profits if there is no downward trend in market of your work sector. If you were able to cross the hurdle of three years + downward movement then your work/project will give you long term benefits and after 5-6 years you can expand and after 10 years definitely you will have the ability to operate smoothly.
In short we can say FIRST YEAR FOR LOSS, second year NO PROFIT NO LOSS and third year SOME SAVING / PROFIT and if everything goes well with grace of god you will be comfortable with your project after 5-6 years.