Re-look at Gorshkov deal, thanks to CAG report- Hindustan Times
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Thursday, July 30, 2009
Wednesday, July 29, 2009
Thursday, July 23, 2009
गंगा प्रकर्ति की देन
मैने एक हिन्दी पत्रिका सशर्त मे कवि श्री अशोक शर्मा जी की व्यंग्य कविता गंगा का तट पर पड़ी ! जिसमे कवि ने लिखा की उनका एक मित्र अपना पुनर्जन्म गंगा का तट पर चाहता है और कवि गंगा की दशा की वयाखाया करते है की आजकल गंगा मे बहुत से गंदे नाले मिल रहा है। कई शहरो के कारखानों का जहरीला पानी भी गंगा मे बहाया जाता है। गंगा नदी का किनारों पर छोटा और लघु उद्योगों का खुलना आम बात है तथा पूजा की सामग्री और पालीथीन के कचरे से इसका बहाव बंद है । गंगा के किनारों पर लोग शव जलाते है और अधजले शवो, मरे पशुओ को भी इसमे बहाते है । सभी नगरो का कूड़ा कचरा भी इसकी गंदगी का मुख्य कारण है और अब तो इसका पानी पीना लायक भी नही रह गया है । गंगा मे रोज़ नहाने वाले लोग अब अपनी घरो मे ही नहाते है। इसकी सफाई योजना का पैसा योजना वाले लोग ही डकार गये। अंत मे कवि अपने मित्र को कहते है की यदि तुम्हे गंगा तट पर ही पुनर्जन्म लेना है तो पहले इसके तट को पुनर्जन्म लेने योग्य बना लो आशय है की गंगा की गंदगी दूर करो इसकी सफाई के परती कुछ प्रयास करो ताकि आने वाली नस्लों को हम एक साफ सुथरी और पवित्र गंगा नदी मिल सके ।
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