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जब ना कोई फ़िक्र थी

आज शाम आसमान के क्षितिज पर 
जब देखा उभरे हुए चाँद की लकीर को 

याद आ गया फिर गुजरा समय 
जब ना कोई फ़िक्र थी 
ना कोई जिम्मेवारी थी 

घूमते थे, खेलते  थे मस्त थे 
चाहे सर्द शाम हो या गर्म दोपहर हो 
बारिश हो या फिर तुफान 
ना कोई फ़िक्र थी 
ना कोई जिम्मेवारी थी

पर अब तो समय नहीं है अपने लिए 
काम बहुत है एक पूरा तो दूसरा अधुरा 

याद आ गया फिर गुजरा समय 
जब ना कोई फ़िक्र थी 
ना कोई जिम्मेवारी थी 

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HAPPY REPUBLIC DAY 2018

HAPPY REPUBLIC DAY 2018

Dr Hariom panwar kashmir ka dard

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इंसान और इंसानियत

क्यों बदल गया है इंसान
क्यों खत्म हो गई इंसानियत
क्यों दया, प्रेम और मानवता खो गई

क्यों कर्म करते है धन के लिए
क्यों बदल गया है इंसान

भूले भटके  जब कभी सुनता पढ़ता हूँ खबर कोई अच्छाई की
तो मन खुश होता है कि इन्सानियत जिन्दा है

क्यों समाज के पटल की मानसिकता विकृत हो गई
भागम भाग की ज़िन्दगी में नहीं है समय परायो को छोड़ो अपनों के लिए

सब कुछ तोला जाता है पैसों से
सब  कुछ हो जाता है पैसों से
धर्म , न्याय और कर्म सब  होता है पैसों से

कर्म की परिभाषा है पैसा
मेहनत की परिभाषा है पैसा
बुद्धि  की परिभाषा है पैसा
ज्ञान की परिभाषा है पैसा
सब कुछ है पैसा

इसलिए बदल गया है इंसान
इसलिए खत्म हो गई इंसानियत

श्याम नाम की पगली - लाइव - संजय मित्तल - Shyam Naam Ki Pagli - Live - HD

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WBJEE 2018 | Exam Pattern | Important Colleges | Dates

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Happy New Year 2018

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